प्रथमः पाठः - वयं वर्णमालां पठामः
(अभ्यासपत्रम् / Practice Worksheet - स्व-मूल्यांकनम्)
१. वर्णानाम् उच्चारणस्थानानि (बहुविकल्पीय-प्रश्नाः / MCQs)
निर्देशः: दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर पर क्लिक कीजिए। अपने उत्तर की पुष्टि करने के लिए "उत्तरं पश्यन्तु" बटन दबाएँ।
प्रश्न १
'क' वर्णस्य (क-वर्गस्य) उच्चारण-स्थानम् किम् अस्ति?
उत्तरम्: (B) कण्ठः
व्याख्या: 'अकुहविसर्जनीयानां कण्ठः' सूत्र के अनुसार 'क'-वर्ग (क, ख, ग, घ, ङ) का उच्चारण कण्ठ (गले) से होता है।
व्याख्या: 'अकुहविसर्जनीयानां कण्ठः' सूत्र के अनुसार 'क'-वर्ग (क, ख, ग, घ, ङ) का उच्चारण कण्ठ (गले) से होता है।
प्रश्न २
'इ' स्वरस्य 'च'-वर्गस्य च उच्चारणं कुतः भवति?
उत्तरम्: (C) तालु
व्याख्या: 'इचुयशानां तालु' सूत्र के अनुसार 'इ', 'च'-वर्ग (च, छ, ज, झ, ञ), 'य' और 'श' का उच्चारण-स्थान तालु है।
व्याख्या: 'इचुयशानां तालु' सूत्र के अनुसार 'इ', 'च'-वर्ग (च, छ, ज, झ, ञ), 'य' और 'श' का उच्चारण-स्थान तालु है।
प्रश्न ३
'त-वर्गस्य' (त, थ, द, ध, न) उच्चारण-स्थानम् किम् अस्ति?
उत्तरम्: (A) दन्ताः
व्याख्या: 'लृतुलसानां दन्ताः' सूत्रानुसार त-वर्ग के अक्षरों को बोलते समय जिह्वा दाँतों का स्पर्श करती है।
व्याख्या: 'लृतुलसानां दन्ताः' सूत्रानुसार त-वर्ग के अक्षरों को बोलते समय जिह्वा दाँतों का स्पर्श करती है।
प्रश्न ४
'व' वर्णस्य उच्चारण-स्थानम् किम् अस्ति?
उत्तरम्: (B) दन्त्योष्ठम्
व्याख्या: 'वकारस्य दन्त्योष्ठम्' - 'व' वर्ण का उच्चारण ऊपरी दाँतों और निचले होंठ की सहायता से होता है।
व्याख्या: 'वकारस्य दन्त्योष्ठम्' - 'व' वर्ण का उच्चारण ऊपरी दाँतों और निचले होंठ की सहायता से होता है।
प्रश्न ५
'उ' तथा 'ऊ' स्वरयोः 'प-वर्गस्य' च उच्चारण-स्थानम् किम्?
उत्तरम्: (C) ओष्ठौ (होंठ)
व्याख्या: 'उपूपध्मानीयानाम् ओष्ठौ' सूत्रानुसार उ, ऊ तथा प-वर्ग के उच्चारण में होंठों की प्रधानता होती है।
व्याख्या: 'उपूपध्मानीयानाम् ओष्ठौ' सूत्रानुसार उ, ऊ तथा प-वर्ग के उच्चारण में होंठों की प्रधानता होती है।
प्रश्न ६
'अनुस्वारस्य' (अं) तथा वर्ग-पञ्चमवर्णानां (ङ, ञ, ण, न, म) उच्चारणं केन सह भवति?
उत्तरम्: (A) नासिकया (नाक से)
व्याख्या: 'ञमङणनानां नासिका च' - अनुस्वार और पंचमाक्षर अपने उच्चारण-स्थान के साथ-साथ नासिका से भी बोले जाते हैं।
व्याख्या: 'ञमङणनानां नासिका च' - अनुस्वार और पंचमाक्षर अपने उच्चारण-स्थान के साथ-साथ नासिका से भी बोले जाते हैं।
२. वर्ण-विच्छेदः (अक्षरों को अलग-अलग करना)
निर्देशः: नीचे दिए गए संस्कृत शब्दों का वर्ण-विच्छेद अपने अभ्यास-पुस्तिका में कीजिए, फिर "उत्तरं पश्यन्तु" पर क्लिक करके उत्तर मिलाएँ।
| क्र.सं. | संस्कृत-पदम् (शब्द) | वर्ण-विच्छेदः (उत्तरम्) |
|---|---|---|
| 1 | कमलम् |
कमानुगत विच्छेद: क् + अ + म् + अ + ल् + अ + म्
|
| 2 | गणेशः |
कमानुगत विच्छेद: ग् + अ + ण् + ए + श् + अः
|
| 3 | वृक्षः |
कमानुगत विच्छेद: व् + ऋ + क् + ष् + अः (*क्ष = क् + ष)
|
| 4 | चंद्रः / चन्द्रः |
कमानुगत विच्छेद: च् + अ + न् + द् + र् + अः (*न्द्र = न् + द + र)
|
| 5 | पित्राज्ञा |
कमानुगत विच्छेद: प् + इ + त् + र् + आ + ज्ञ् + आ (*त्र = त् + र)
|
३. वर्ण-संयोजनम् (विच्छेदित वर्णों को जोड़कर पद बनाना)
निर्देशः: पृथक्-पृथक् किए गए वर्णों को जोड़कर संयुक्त पद (शब्द) बनाइए।
| क्र.सं. | विच्छेदित-वर्णमाला | संयुक्त-पदम् (उत्तरम्) |
|---|---|---|
| 1 | व् + अ + र् + ण् + आः |
संयुक्त पद: वर्णाः
|
| 2 | म् + अ + य् + ऊ + र् + अः |
संयुक्त पद: मयूरः
|
| 3 | प् + अ + ङ् + क् + अ + ज् + अ + म् |
संयुक्त पद: पङ्कजम्
|
| 4 | श् + अ + ङ् + ख् + अः |
संयुक्त पद: शङ्खः
|
| 5 | स् + उ + व् + आ + ग् + अ + त् + अ + म् |
संयुक्त पद: स्वागतम्
|
